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स्वामी दयानंद स्वदेशी गौशाला

  स्वामी दयानंद स्वदेशी गौशाला की स्थापना 24 दिसंबर 2023 को डॉ. विनोद कुमार द्वारा की गई। इस गौशाला का मुख्य उद्देश्य भारत की स्वदेशी नस्ल की गायों की रक्षा, संवर्धन और प्रचार-प्रसार करना है। यह गौशाला भारतीय संस्कृति और वेदों में वर्णित गौ-सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है।

गौशाला की स्थापना का उद्देश्य

भारत में स्वदेशी गायों की संख्या लगातार कम हो रही है। विदेशी नस्ल की गायों के बढ़ते प्रभाव के कारण देशी नस्लों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। ऐसे में स्वामी दयानंद स्वदेशी गौशाला का मुख्य उद्देश्य भारतीय नस्लों की गायों जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर, लाल सिंधी, और राठी आदि का संरक्षण करना है। इन गायों का दूध अत्यंत पौष्टिक होता है और इसके औषधीय गुण भी होते हैं। गौशाला में इन नस्लों के संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

गौशाला में उपलब्ध सुविधाएं

  1. खुले और स्वच्छ गौशाला परिसर – गौशाला को प्राकृतिक वातावरण में स्थापित किया गया है, जहां गायों को खुला घूमने की सुविधा मिलती है।

  2. आयुर्वेदिक आहार और चिकित्सा – गायों को जैविक आहार दिया जाता है जिसमें हरा चारा, चने की भूसी, खली और औषधीय पौधे शामिल हैं।

  3. जल और छायादार स्थान – गर्मी और सर्दी के मौसम में गायों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे वे हर मौसम में सुरक्षित रहें।

  4. गोबर और गौमूत्र का उपयोग – गौशाला में गोबर और गौमूत्र से जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक, हवन सामग्री और पंचगव्य उत्पाद बनाए जाते हैं।

  5. गौ चिकित्सालय – बीमार और कमजोर गायों की देखभाल के लिए एक विशेष गौ चिकित्सालय संचालित किया जाता है, जहां अनुभवी वैद्य और पशु चिकित्सक सेवाएं देते हैं।

गौशाला के प्रमुख कार्य

  1. गौ संरक्षण एवं पालन – लावारिस, बीमार, और वृद्ध गायों को आश्रय देकर उनकी देखभाल की जाती है।

  2. गौ उत्पादों का निर्माण – जैविक खाद, पंचगव्य औषधियां, धूपबत्ती, साबुन और गौ-आधारित अन्य उत्पादों का निर्माण किया जाता है | इन शुद्ध और प्राकृतिक उत्पादों को शुद्ध पंचगव्य उत्पादों की दुकान के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाया जाता है, जिससे गौ-सेवा को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने में सहायता मिलती है।

  3. गौशाला पर्यटन और जागरूकता अभियान – लोगों को भारतीय गौ-संस्कृति के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है और गौशाला भ्रमण की सुविधा प्रदान की जाती है।

  4. गौ-आधारित कृषि – जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को गोबर खाद और गौमूत्र आधारित कीटनाशकों के उपयोग की ट्रेनिंग दी जाती है।

गौशाला की भविष्य की योजनाएं

  • स्वदेशी नस्लों के संवर्धन हेतु एक शोध केंद्र की स्थापना।

  • पंचगव्य चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए एक प्राकृतिक उपचार केंद्र।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गौशाला से जुड़े किसानों को आर्थिक सहायता।

  • अधिक से अधिक लोगों को गौसेवा से जोड़ने के लिए अभियान चलाना।

गौशाला में योगदान कैसे दें?

जो भी व्यक्ति गौ-सेवा में योगदान देना चाहता है, वह दान कर सकता है या गौशाला में स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर सकता है। गायों के लिए चारा, औषधि या अन्य आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

स्वामी दयानंद स्वदेशी गौशाला भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और गौ संरक्षण का एक उत्तम उदाहरण है। इसका उद्देश्य न केवल गायों का संरक्षण करना है बल्कि लोगों को स्वदेशी गौवंश के महत्व को समझाकर उन्हें इससे जोड़ना भी है।

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