यह वीडियो हमारी छोटी गौशाला की शुरुआत की कहानी को साझा करता है। 24 दिसंबर 2023 को हमने मात्र दो गायों के साथ अपनी यात्रा शुरू की। पहली गाय का नाम सरस्वती गौ माता था, दूसरी का नाम लक्ष्मी गौ माता, और उनके साथ एक बछड़ा था जिसका नाम नंदी रखा गया। इसके अलावा, एक गाय गर्भवती थी। यह वीडियो हमारे पहले कदम और गायों के इस छोटे परिवार से जुड़ी यादों को दर्शाता है।
आज, 23 दिसंबर 2024, को हमारी स्वामी दयानंद स्वदेशी गौशाला ने अपनी सेवा और समर्पण की एक वर्ष की पवित्र साधना पूरी की है। यह अवसर हमारी निष्ठा, परिश्रम और गौ माता के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक है। हमारे अनुभव और उपलब्धियां: गौ सेवा कर्म से पुष्पित होती है। यह वर्ष हमें सिखाता है कि केवल सेवा भावना से ही जीवन में शुद्धि और आनंद आता है। स्वास्थ्य और संतुलन का आधार: गौ माता की सेवा से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में अपूर्व सुधार हुआ। भोजन प्रबंधन: उनके लिए भूसे का संग्रह किया और नियमित खरीदारी सुनिश्चित की। आरामदायक आवास का निर्माण: गौ माता के लिए बड़ा और सुरक्षित शेड तैयार किया। आत्मनिर्भरता की ओर कदम: दूध becha nhi jata balke , gau seva krke khud piya va bachcho ko pila kar atam nirbhar bna jata hai भविष्य की योजना: 1500 गायों के भोजन के लिए अतिरिक्त भूमि खरीदी । इस शुभ अवसर की प्रेरणा: यह शुभावसर हमें अपनी संस्कृति, प्रकृति और आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करता है। गौ सेवा हमारी आध्यात्मिक यात्रा का आधार बन चुकी है। हमारी गौ सेवा यात्रा में सहभागी बनें और गौ माता की रक्...
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